रत्न

भारतीय ज्योतिष शास्त्रानुसार रत्न किसी ना किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। रत्नों का संसार बेहद बड़ा है। लेकिन विशेष रूप से केवल नौ रत्न ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं। रत्नों का धारण करने से मनुष्य को कई लाभ होते हैं। रत्नों का लाभ और अन्य बातें रत्न से संबंधित ग्रह पर निर्भर करती हैं।

रत्न एक प्रकार के बहुमूल्य पत्थर होते हैं जो बहुत प्रभावशाली और आकर्षक होते हैं। रत्न अपने ख़ास गुणों के कारण आभूषण निर्माण, फैशन और ज्योतिष आदि जैसे कार्यो में प्रयोग में लाये जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्न में दैवीय ऊर्जा समाहित होती है, जिनसे मनुष्य जीवन का कल्याण होता है। रत्न को प्रायः “रत्ती” के द्वारा इंगित किया जाता है।

प्राचीन काल से रत्नों का उपयोग आध्यात्मिक क्रियाकलापों और उपचार के लिए किया जाता रहा है। रत्न शक्तियों का भण्डार होता हैं, जो शरीर में स्पर्श के माध्यम से प्रवेश करता है। रत्न सकारात्मक या नकारात्मक रूप से धारण करने वाले पर असर दिखा सकता है– यह उपयोग में लाये जाने के तरीके पर निर्भर करता है। सभी रत्नों में अलग-अलग चुम्बकीय शक्तियाँ होती हैं। इनमें से कई रत्न उपचार के दृष्टिकोण से हमारे लिए बहुत लाभदायक हैं।

divya_3

क्यों धारण करते हैं रत्न?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार देखें तो हर ग्रह का संबंध किसी न किसी रत्न से होता है और वैसे ही हर रत्न का किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है। जैसे सूर्य का संबंध माणिक्य रत्न से, चन्द्रमा का मोती से, बुध का पन्ना से, गुरु का पुखराज से, शुक्र का हीरा से, शनि का नीलम से, राहू का गोमेद से और केतु का लहसुनिया से।

किसी भी मनुष्य के जीवन में भाग्य परिवर्तन जन्मपत्री में ग्रहों की दशा के अनुसार आता रहता है। अशुभ ग्रहों को शुभ बनाना या फिर शुभ ग्रहों को अपने लिए और अधिक शुभ बनाने की मनुष्य की हमेशा ही चेष्टा रही है जिसके लिए वो अनेकों उपाय करता रहता है, जैसे कि मंत्रों का जाप, दान-पुण्य, स्नान, रत्न धारण, यंत्र धारण, देव-देवी दर्शन आदि। इन सब में रत्न धारण करना एक महत्वपूर्ण एवं असरदार उपाय माना जाता है। रत्न आभूषणों के रूप में शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, साथ ही अपनी दैवीय शक्ति के प्रभाव से रोगों का निवारण भी करते हैं।

कितने प्रकार के होते हैं रत्न?

जिस प्रकार से सात ग्रह ,सात रंग, संगीत के सात सुर, सात दिन, योग में सात चक्र, शरीर में सात ग्रंथियां होती हैं, उसी प्रकार सात महत्वपूर्ण रत्न भी होते हैं, जिन्हें हम माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा और नीलम के नाम से जानते हैं। इसके अलावा गोमेद और लहसुनिया 2 और रत्न होते हैं जो बेहद प्रचलित हैं और इनका भी बहुत महत्व है।

ये सातों रत्न 12 राशियों के स्वामी ग्रहों के राशि रत्न भी होते हैं। आईये जानते हैं कि कौन सी राशि के लिए कौन सा रत्न उपयुक्त है।

राशि स्वामी ग्रह राशि रत्न
मेष वृश्चिक मंगल मूंगा
वृष तुला शुक्र हीरा
मिथुन कन्या बुध पन्ना
धनु मीन बृहस्पति पुखराज
मकर कुंभ शनि नीलम
सिंह सूर्य सूर्य माणिक्य
कर्क चंद्र चंद्र मोती

अपने लिए सही रत्न की जानकारी हो जाने के बाद यह भी जान लेना आवश्यक है कि रत्नों को धारण करने की सही विधि क्या है और इन्हें धारण करने के लिए सबसे अच्छा और शुभ दिन कौन सा है। नीचे आपको प्रत्येक रत्न को धारण करने के लिए उत्तम दिन की जानकारी दी जा रही है जो इस प्रकार हैं-

माणिक्य रविवार अनामिका अंगुली (Ring finger)
मोती सोमवार कनिष्ठिका अंगुली (Little finger)
पीला पुखराज गुरुवार तर्जनी अंगुली (Index finger)
सफ़ेद पुखराज शुक्रवार तर्जनी अंगुली (Index finger)
लाल मूंगा मंगलवार अनामिका अंगुली (Ring finger)
पन्ना बुधवार कनिष्ठिका अंगुली (Little finger)
नीलम शनिवार मध्यमा अंगुली (Middle finger)
गोमेद शनिवार मध्यमा या कनिष्ठिका अंगुली
लहसुनिया शनिवार कनिष्ठिका अंगुली (Little finger)
उत्पाद
WhatsApp WhatsApp us